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प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी रोजगार के ढेरों अवसर

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प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी रोजगार के ढेरों अवसर

Post by KULDEEP BIRWAL on Sun Oct 28, 2012 9:26 pm

हाल के वर्षो में प्रिंटिंग तकनीक ने बहुत तेजी से विकास किया है और इसका इस्ते माल तरह- तरह के बदलावों के साथ बढ़ता जा रहा है। इस तकनीक में लगातार हो रहे विस्तार ने आज बाजार में प्रिंटिंग के क्षेत्र में तरह-तरह के मौके पैदा किये हैं

आज डिजिटल दुनिया की जिंदगी में दखलअंदाजी चाहे कितनी ही क्यों न बढ़ जाए, मगर किताबों और प्रिंटिंग तकनीक का महत्व कम नहीं हुआ है। बाजारीकरण की दुनिया में रंगबिरंगी पत्र-पत्रिकाएं, टेक्स्ट बुक और अखबार का प्रचार-प्रसार बढ़ रहा है। जालसाजी से बचने के लिए आए दिन तरह-तरह की करेंसियां छापी जा रही हैं। इस आबोहवा ने हाल के वर्षों में प्रिंटिंग तकनीक का बहुत तेजी से विकास किया है और इसका इस्तेमाल विभिन्न बदलावों के साथ बढ़ता जा रहा है। अनुमान के मुताबिक, देश में छोटे-बड़े, नए-पुराने कुल मिलाकर 50 हजार से अधिक प्रिंटिंग प्रेस कार्यरत हैं जिनमें करीब 10 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। भारत में देखें तो अंग्रेजी और हिन्दी में इसका सबसे बड़ा बाजार है। रोजगार के लिहाज से निजी उद्यम और किसी कंपनी में बतौर कर्मचारी दोनों तरीके से काम करने के अवसर उपलब्ध हैं। बस जरूरत है विशेषज्ञता हासिल करने की।

कोर्स प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी के कारण पत्र-पत्रिकाएं, करेंसी, नोट, स्टाम्प आदि कई खूबसूरत एवं आकर्षक रंग में उपलब्ध हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, माइक्रोप्रोसेसर युक्त कंप्यूटर तथा लेसर जैसी उच्च तकनीक आने के बाद से प्रिंटिंग तकनीक पूरी तरह हाईटेक हो गई है। अब प्रिंटिंग का व्यवसाय केवल सादे कागज की छपाई तक सीमित नहीं रह गया है अपितु बहुविषयी उद्योग का रूप लेता जा रहा है, जिसकी मुख्य वजह प्रिंटिंग तकनीक में आए विविध परिवर्तन है। आज प्रिंटिंग क्षेत्र को एक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। साधारण भाषा में प्रिंटिंग की परिभाषा को समझें तो प्रिंटिंग में शब्दों व ग्राफिक्स का समन्वय करके कागज, बोर्ड या धातु पर स्याही द्वारा उसे अंतिम रूप दिया जाता है। प्रिं टिंग की तकनीक में प्रारंभिक रूप से फिल्म मेकिंग, प्लेट मेकिंग, मशीन प्रिंटिंग आदि आते हैं। इसके बाद फिल्म से प्लेट बनाकर प्रिंटिंग के लिए प्रेस में भेजा जाता है। आधुनिक तकनीक के आ जाने के कारण अब सीधे कंप्यूटर से ही प्लेट बन रही हैं। प्रिंटिंग तकनीक के पाठ्यक्रमों में प्रिंटिंग प्रोसेस, टाइपोग्राफिक डिजाइन, ग्राफिक रिप्रोडक्शन, लैटर प्रेस, लिथोग्राफी, लैटर असेंबली, बुक बाइंडिंग, प्रोसेसिंग, कैमरा ऑपरेशन, फोटो इंग्रेविंग, प्रिंटर्स मशीनरी मेकेनिज्म एंड मेंटेनेंस, लियो ऑफसेट प्रिंटिंग तकनीक आदि की विस्तार से जानकारी दी जाती है। प्रिंटिंग की अलग-अलग प्रक्रियाओं से रू-ब-रू कराया जाता है। कहने का आशय यह है कि इसमें प्रिंटिंग की अलग-अलग विधियों के अलावा ग्राफिक डिजाइन, टाइपोग्राफी, इंजीनियरिंग डाइंग, प्रिंटर्स साइंस, कंप्यूटर का परिचय, लैटर असेम्बलिंग, पेज मेकिंग, प्रेस वर्क, डिजिटल प्रिंटिंग, रिप्रोडक्टिव फोटोग्राफी, प्रिंटिंग मशीन, मेंटनेंस एंड उपकरण, बिजनेस मैनेजमेंट और लागत के आकलन पाठ्यक्रम में शामिल हैं।

दाखिला प्रिंटिंग तकनीक का ज्ञान आमतौर पर 10वीं कक्षा पास होने के बाद ही कराया जा रहा है। दिल्ली स्थित पूसा पोलीटेक्नीक कॉलेज में प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी में तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्स कराया जाता है। इनमें दाखिला हर साल कॉमन एंट्रेंस परीक्षा के जरिए होता है। छात्र को 10वीं में अंग्रेजी, गणित और साइंस पढ़ा होना जरूरी है।

अवसर डिप्लोमा हासिल करने के बाद निजी और सरकारी- दोनों क्षेत्रों में जाने के कई अवसर हैं। शुरुआत में आमतौर पर बतौर सुपरवाइजर ज्वाइनिंग होती है। इसके बाद सहायक मैनेजर, वरिष्ठ प्रबंधक और मुख्य प्रबंधक तक जाने के अवसर हैं। कहीं तकनीकी अधिकारी तो कहीं प्रोडक्शन अधिकारी के रूप में प्रिंटिंग टे क्नोलॉजी में डिप्लोमा हासिल करने वाले को मौका देते हैं। उन्हें पब्लिकेशन अधिकारी के रूप में भी विभिन्न जगहों पर रखा जाता है। बैंकिंग क्षेत्र में इन्हें प्रिंटिंग टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में मौका दिया जाता है। इसके बाद वरिष्ठ प्रबंधक और मुख्य प्रबंधक तक पदोन्नति दी जाती है। निजी क्षेत्र में भी प्रिंटिंग से जुड़े कामों में कमोबेश इसी तरह की जिम्मेदारी से छात्रों को लैस किया जाता है।

वेतन डिप्लोमा के बाद छात्रों को सरकारी संस्थानों में शुरुआती दौर में 20 से 25 हजार रुपये की नौकरी मिल जाती है। जैसे-जैसे पद और अनुभव बढ़ता है, वैसे-वैसे वेतन में बढ़ोतरी होती जाती है। जब इसके विशेषज्ञ मुख्य प्रबंधक या निदेशक बन जाते हैं तो उनकी सैलरी एक लाख रुपये प्रतिमाह तक हो जाती है। स्वरोजगार के तहत पूंजी लगाकर लाखों रुपये प्रतिमाह कमाये जा सकते हैं।

अनुपम

संस्थान पूसा पोलिटेक्नीक कॉलेज, दिल्ली रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी, कोलकाता, मद्रास, मुंबई, इलाहाबाद गवर्नमेंट पोलिटेक्नोलॉजी कॉलेज, जबलपुर जादवपुर यूनिवर्सिटी, कोलकाता गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सि
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